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कोरिया समाचार

अधिकार समझ कर ले योजनाओ का लाभ: संसदीय सचिव श्री राजवाड़े।

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चिरमी जन समस्या निवारण शिविर में 67 आवेदन मौके पर ही हुए निराकृत

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किसानो को स्प्रेयर पुमप, वन्धिकार के पट्टे व निःशुल्क बीज मिनीकिट का वितरण

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प्राकृतिक आपदा पीडितो को मिली 3.27 लाख रूपए की रहत राशी.

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संसदीय सचिव श्री राजवाड़े जी ने प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र भवन का किया लोकार्पण.

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झुमका बाँध में बाढ़ आपदा प्रबंधन का हुआ पूर्वाभास. सेना के तैरक और मछुआ समिति के सदस्यों ने बाढ़ राहत कार्य का किया संयुक्त पूर्वाभास. एस.इ.सी.एल. द्वारा गैस और अग्नि दुर्घटना की स्थिति में किये जाने वाले आपदा प्रबंधन का प्रदर्शन.

October 01, 2011

Bhalu ki Maut

कोरिया जिले में आज वन विभग के अधिकारियो की कायराना हरकत सामने आई है. बैकुंठपुर से ३० किलोमीटर दूर बरपानी गाँव में भालू को काबू न कर पाने के कारन मौत के घाट उतर दिया गया. इससे पहले भालू ने १ ग्रमीण को मौत के घाट उतरा था और ३ ग्रामीणों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था.

वीओ- बरपानी गाँव में उस समय दहशत का माहौल तैयार हो गया जब भालू ने एक ग्रामीण को मौत के घाट उतर दिया. भालू ने ग्रामीण को मारने के बाद उसके शव को लगभग २ घंटे तक खरोंचता रहा. इस बात को देख समस्त ग्रामीण एकत्रित हो गए और उसे भागने की कोशिश की ताकि वह शव छोड़ कर के भाग जाये लेकिन भालू शव के साथ चीरफाड़ करता रहा. इस वीभत्स नज़ारे को देख कर सारे ग्रामीण भयभीत हो गए. लेकिन भालू नहीं भागा बल्कि जिन गरामनो ने उसे भागने की कोशिश की भालू ने उस पर भी हमला बोल दिया. जिसमे ३ ग्रामीण और गंभीर रूप से घायल हो गए. जिन्हें तत्काल रूप से जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर इलाज के लिए रिफर कर दिया गया.

इस बीच वन विभाग का अमला भी बरपानी गाँव पहुँच गया. और पड़ाके फोड़ कर भालू को भागने की किशिश की. लेकिन भालू तस से मस नहीं हुआ. भालू को भागने के लिए वन विभाग के अधिकारीयों ने हवाई फायर भी किये. लेकिन फिर भी भालू नहीं भगा. इस बात से तंग हो कर वन विभाग के अधिकारीयों का आदेश प् कर पुलिस वालो को जान मारने का आदेश दिया गया. जिसमे पुलिस वालिओने गोली चला कर भालू की जान ले ली. गोली लगते ही भालू को तो मौत हो गयी. लेकिन इस बात को मीडिया के सामने नहीं लेन दिया गया. बल्कि मीडिया को भ्रमित कर यहाँ बताया गया की ग्रामीणों ने भालू को मार डाला. इस बात की पोल तब खुली जब मीडिया कर्मियों ने भालू पर चोट के निशान देखे ही नहीं भालू पर चोट के निशान के बजाये गोली का निशान था और उसके शरीर से खून बह रहा था. इस बात को जब मीडिया ने अधिकारीयों से पूछा तो अधिकारी पहले तो टाल मटोल करने लगे लेकिन अंततः उन्हें स्वीकारना पड़ा कि भालू की मौत गोली लगने से हुई और उच्चाधिकारियों से आदेश लेकर ही भालू पर गोली चलायी गयी. अधिकारीयों का ये भी कहना था की भालू काबू में नहीं आ रहा था और वह शव को छोड़ कर जा ही नहीं रहा था मजबूरन हमे गोली चलानी पड़ी.

वनविभाग के इस कायराना हरकत से भालू की तो मौत हो गयी लेकिन अगर विभाग के अधिकारी चाहते तो भालू को बेहोशी का इंजेक्सन लगा कर उसे काबू में पाया जा सकता था. पर वन विभाग ने इस प्रकार का कोई प्रयत्न नहीं किया. और आसान रास्ता देख भालू को ही समाप्त कर दिया. हम आपको बता दे जिस भालू की मौत हुई वह मादा भालू थी. मादा भालू की मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है क्या इंसान और जानवर में कोई फर्क नहीं है. या वनविभाग के अधिकारीयों ने जल्दबाजी में कोई गलत फैसला तो नहीं ले लिया.

(सहारा समय)

September 26, 2011

Regional Hospital Me Ban Medicines

चिरमिरी के एस इ सी एल रीजनल अस्पताल में लाखो की प्रतिबंधित दवाइया पायी गयी है ये खुलासा तब हुआ जब एस डी एम ने छापा मारा.

भारत सरकार के राजपत्र में पूर्ण रूपेण प्रतिबंधित दवाइया एस इ सी एल के रीजनल अस्पताल चिरमिरी में मरीजो को दी जा रही थी. जब इस बात की भनक एस डी एम चिरमिरी को लगी तो उन्होंने तत्काल टीम बना कर अस्पताल में छापा मारा. छापा मर कर उन्होंने अस्पताल से एक लाख टेबलेट और सैकड़ो की संख्या में सिरप की बोतले जब्त की. इन दवाइयों को एंटी बायोटिक व सर्दी जुखाम में अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजो को डी जाती थी लेकिन इन दवाइयों के लगातार सेवन से सेहत में दुस्प्रभाव परिलक्षित होता है. इसलिए इसे भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया गया था. लेकिन सवाल यह उठता है क्जब यह दवाइया प्रतिबंधित थी तो अस्पताल में कैसे पहुंची. इन दवाओ की कीमत अंतर्राज्जीय बाज़ार में लाखो में आंकी जा रही है.

हांलाकि एस इ सी एल का अस्पताल प्रबंधन कैमरे के सामने कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुआ. लेकिन इस छापा मार कार्यवाही ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जैसे से इ सी एल रीजनल अस्पताल के चिरमिरी में अगर ये दावा मौजूद है तो समूचे एस इ सी एल अस्पतालों में भी इन दवाओ का प्रयोग हो रहा होगा. इसी प्रकार अगर भारत साकार द्वारा प्रतिबन्ध लगाया गया है तो धड़ल्ले से लाखो की मात्र में दवाइयों का मिलना अधिकारियो की मिली भगत की और इशारा कर रहा है. वही दवा कंपनी के निर्माता व सप्लाई एजेंसी भी बेख़ौफ़ हो कर इसे बना कर खपा रहे हैं. इसका भांडा फोड़ होना आवश्यक है. जिस प्रकार एस डी एम चिरीमिरी ने अस्पताल में छापा मारा है कहीं न कही एस इ सी एल अधिकारीयों को संलिप्तता जाँच में सामने आ सकती है.

(सहारा समय)

September 21, 2011

Rishto Me Aag

रिश्तो की कडवाहट किसी भाई को इतना मजबूर कर देगी कि वो अपनी सगी बहन को आग के हवाले कर देगा, सुनाने में जरुरअटपटा लगेगा लेकिन इस काम को अंजाम देने वाला चिरमिरी बड़ा बाज़ार का रहने वाला राजा पटेल है उसने अपनी सगी बहन को जिन्दा जलने कि कोसिस की लेकिन कहते हैं न "जाको राखे साईया मार सके न कोई". प्रिया के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ ४ महीने मौत के साथ लड़ने वाली प्रिया को होश आया तो उसने भाई राजा के खिलाफ ठाणे में रिपोर्ट दर्ज कराइ.

प्रिया की ४½ साल पहले शादी हुई थी. शादी के कुछ दिनों बाद उसे एक लड़की पैदा हुई लेकिन प्रिया के पति से उसका एक साल बाद तलक हो गया. वो अपनी बच्ची को लेकर मायके आ गयी. प्रिया का भाई राजा उसकी भाभी और उसकी माँ चिरमिरी के बड़ा बाजार में रहते थे. मायके वापस आने के बाद प्रिया और उसकी भाभी में अक्सर झगड़े होते रहते थे. जिस बात को लाकर राजा अक्सर तनाव में रहता था. वह भी अपनी बहन के साथ मारपीट करता था. घटना के दिन भी प्रिया के भाई ने अपनी माँ से पैसे की मांग की. क्यों की राजा की माँ कालिरी कर्मचारी थी और उसके पास २½ लाख रुपये की जमा पूंजी थी . जिसमे अक्सर राजा की नज़र रहती थी लेकिन प्रिया की माँ ने उसे किसी मुसीबत के समय काम आने के लिए जोड़े थे लेकिन राजा की नज़र उस पर थी और घटने के दिन उसे इसी बात से चिढ कर अपनी बहन को जलाने की कोसिस की.

घटना के ४ दिन बाद ही प्रिया की माँ की मौत हो गयी जिस पर भी अभी तक रहस्य बना हुआ है वही पुलिश गिरफ्त में आया राजा पटेल अपने आप को बेगुनाह बता रहा है. फ़िलहाल प्रिया का भाई सलाखों के पीछे पहुँच गया है. और उसकी भाभी की तलाश जरी है. और पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.

September 14, 2011

Mantri ki Dadagiri

बैकुंठपुर जनपद पंचायत के सी.इ.ओ. एम् एल वर्मा ने संसदीय सचिव भैयालाल रजवाड़े के ऊपर अपने पद का दुरूपयोग कर अपमान जनक टिपण्णी करने का आरोप लगाया है.

दिनांक १२/०९ की शाम ४:२७ मिनट की है जिसमे सी.इ.ओ एम् एल वर्मा ने भैय्लाल के द्वारा बुलवाने पर उनसे मिलने गए और सिक्षा कर्मी वर्ग ३ पर नियुक्त राजधनी यादव के बारे में पूछताछ करने लगे जवाब में की इ ओ ने बताया की राजधनी यादव को जिला पंचायत कार्यपालन अधिकारी द्वारा हटाया गया है. जिसकी जांच भी की गयी है. की.इ ओ. ने आगे बताया संसदीय सचिव द्वारा राजधनी यादव को पद से पृथक किये जाने पर वे नाराज़ थे और उनको किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी गयी थी. इतना ही नहीं वहा उपस्थित जनप्रतिनिधियों के समक्ष उन्होंने गाली गलोच भी की और अनेक प्रकार का दबाव भी डाला. इस बात से दुखी हो कर के जनपद पंचायत सी-इ-ओ ने बैकुंठपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई.

विओ- वाही इस सम्बन्ध में जब मंत्री महोदय से संपर्क साधा गया तो उन्होंने दूरभाष पर कहा कि सी.इ.ओ द्वारा  सिक्षा कर्मी राजधनी यादव से पिछले सात महीनो से ५०००० रुपये की मांग की जा रही थी जो की गरीब परिवार से होने के कारन सी.इ.ओ की मांग पूरी न कर सका.. जिस पर अपने शासकीय पद का दुरूपयोग करते हुए सी.इ.ओ बैकुंठपुर ने उसे पद पृथक कर दिया. जिस बात के लिए मैंने उसे सब के सामने डांटा और जो भी गरीबो के साथ इस प्रकार के कृत्या करेगा तो भैयालाल रजवाड़े उसे जरुर ठीक करेगा.

इस घटना को ले कर पुलिस दुविधा में है. एक तरफ शासकीय अधिकारी और दूसरी तरफ संसदीय सचिव पुलिस चाह कर भी अभी तक कुछ नहीं कर पाई है. हालाकी पुलिस अधीक्षक अभिषेक पाठक ने बात चीत करते हुए कहा है की मामले की पूरी तरह से जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जायेगा उस पर कार्यवाही की जाएगी.

September 03, 2011

Banji Bundeli Road me Baadh

दिनांक ०२/०९/२०११ की रात में हुई बरसात ने बंजी बुन्देली के लोगो को तकलीफ में दाल दिया है. बंजी बुन्देली के रस्ते में पड़ने वाले रपटे में कल रत की बरसात के बाद से पानी ने अपना जोर दिखाया है. सुबह तक रपटे में इतना पानी भरा था की लोगो को आने जाने में परेशानी का सामने करना पड़ रहा था. और आज सुबह से फिर से पानी ने वही तूल पकड़ा हुआ है. जिससे इस रस्ते का पानी कम होने के आसार दिखाई नहीं पद रहे हैं.


August 27, 2011

Laapata Vidhayak

मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाने को लेकर १६ अगस्त को स्थानीय लोगो ने जिला बनाओ आन्दोलन शुरू किया था, इस समिति में कांग्रेस, भाजपा, के साथ साथ स्थानीय लोगो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, आन्दोलन की शुरुआत के दिन जन समुदाय को संबोधित करते हुए विधायक दीपक पटेल ने अंतिम छोर तक लड़ाई का आश्वासन दिया. लेकिन आन्दोलन के आठवे दिन 23 अगस्त को विधायक दीपक पटेल के लापता होने की खबर कांग्रेसियों ने स्थानीय थाने मनेन्द्रगढ़ में कराइ.

स्वफूर्त चल रहे इस आन्दोलन को उम्मीद की एक किरण नज़र विधायक दीपक पटेल के रूप में नज़र आई उन्होंने सुरुआती दिनों में आन्दोलन कारियों को समझाइश दी थी किसी उग्र रूप का प्रदर्शन करके हम मनेन्द्रगढ़ को जिला नहीं बना सकते. लेकिन अगर शांति प्रिय आन्दोलन जारी रहा था हमारा मनेन्द्रगढ़ जिला अवश्य बनेगा, आन्दोलन कारियों ने ठीक वैसा ही किया. मनेन्द्रगढ़ बंद, चक्का जाम, महिला मोर्चा, बच्चो की रैली, मशाल रैली और काली पट्टी लगा कर वे विरोध कर रहे थे. इसी बीच मनेन्द्रगढ़ से प्रतिनिधि मंडल रायपुर अपनी मांगो को लेकर मुख्य मंत्री डॉ. रमन सिंह से २१ अगस्त को मिलने गया जिसमे मनेन्द्रगढ़ विधायक के नेतृत्व में, भरतपुर विधायक फूल सिंह, भाजपा वरिष्ठ नेता सुदर्शन अग्रवाल, लखन श्रीवास्तव, अनिल केशरवानी, अर्चना जैसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष धर्मेन्द्र पटवा, नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेंदर राणा, सत्य नारायण के साथ युवा मोर्चा जिलाध्क्ष्य संजीव सिंह शामिल हुए. जब वह प्रतिनिधि मंडल रवाना हुआ तो यह भी तय किया गया की जिला बनाओ संघर्ष समिति के दो सदस्यों भी शामिल किया किये जायेंगे. और उन्हें मुख्या मंत्री से मिलने के लिए साथ ले जायेंगे लेकिन एन वक्त पर सिर्फ भाजपा पदाधिकारी व भाजपा विधायक ही रवाना हुए, जिससे आन्दोलन कारियों को अविश्वास हुआ क्यों की जिन भाजपा नेताओ एवं विधायक को ले जाया जा रहा था उन्होंने वादा किया था कि कुछ भी हो जाये लेकिन वो मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाने की मांग हो प्रभावी रूप से रखेंगे और अगर मुख्य मंत्री नहीं माने तो वे सभी अपना इस्तीफ़ा मुख्य मंत्री के टेबल में पर रख आयेंगे.

२२ अगस्त को प्रतिनिधि मंडल मनेन्द्रगढ़ पहुंचा जनता बेसब्री से उनके आने का इन्तेजार कर रही थी शाम ४ बजे बैठक आयोजित की गयी जिसमे प्रतिनधि मंडल ने अपनी बात कही, हम आपको दस सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल जिसके मुखिया विधायक दीपक पटेल थे वे मीटिंग में उपस्थित नहीं थे जिससे जनता काफी निराश हुई और जैसे प्रतिनिधि मंडल ने अपनी बात ख़तम की वैसे ही कांग्रेस पार्टी के लोग आग बबूला हो गए. क्योंकि जिस प्रकारकी बाते जनता से कही गयी थी उस प्रकार की कोई बात प्रतिनिधि मंडल ने नहीं की और सिर्फ आश्वाशन लेकर आ गए. जिस पर कांग्रेसियों ने फायदा उठाते हुए विधायक दीपक पटेल को वहा उपस्थित होने की बात कहते रहे, और विधायक को लाओ का नारा लगते रहे.

मामले को शांत न होते देख भाजपा जन प्रतिनिधि के सदस्य सुदर्शन अग्रवाल वहा से चले गए वाही इस नज़ारे को देख जनता मूक दर्शक बनी रही. क्योंकि जिस आन्दोलन की नीव जनता ने राखी थी वह डगमगाने लगा था, वही क्षुब्ध कांग्रेसियों ने विधायक को न पाकर उसके लापता होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराइ.
मीडिया में जैसे ही बात की खबर छपी आनन् फानन में भाजपाइयो ने एक बैठक आहूत की जिसमे उन्होंने कांग्रेसियों की मानसिकता को छोटा बताया.

जिला बनाओ संघर्ष समिति के इस आन्दोलन में विधायक के लापता होने की खबर जसी ही प्रकाशित हुई आन्दोलन बिखर गया. क्योंकि जिस सोच से यह आन्दोलन शुरू किया गया था वो सोच ही दूषित निकली. जनता दो चक्कों के पातो में पिस कर रह गयी. और एक तरफ भाजपाई कांग्रेसियों पर आरोप लगते हैं और दूसरी तरफ कांग्रेसी भाजपाइयो पर निशाना साधते रहते हैं लेकिन दोनों ही सूरतो में मनेन्द्रगढ़ की जनता पिसती नजर आई वही स्वार्थ की राजनीति से उठकर अगर मनेन्द्रगढ़ के हित के बारे में नेताओ ने सोचा होता तो शायद यह आन्दोलन अन्ना हजारे के जैसे विशाल रूप लेता लेकिन राजनीति हमेशा अपना स्वार्थ देखती है.

August 22, 2011

Kabad

मनेन्द्रगढ़ पुलिस ने एक ट्रक कबाड़ जब्त किया, बताया जाता है. की उक्त ट्रक भाजपा नेता की है, और पुलिस अभी विवेचना कर रही है कि यह कबाड़ किसका था, और किसे भेजा जा रहा था. फ़िलहाल पुलिस ने ड्राईवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

शहर में इन दिनों अवैध धंधो का काम जोरो से चल रहा है कबाड़ हो या सट्टा या फिर जुआं जैसे सभी धंधो को स्थानीय नेताओ की पनाह पर संचालित किया जा रहा है. पूर्वे में शहर में जिस कबाड़ी का व्यवसाय फलफूल रहा था उस पर कतिपय नेताओ की मेहरबानी थी, जिससे वह संचालित हो रहा था और भाजपा के संगठन में बदलाव के बाद इस कबाड़ी पर दो चार बार कार्यवाही की गयी, और उसके बाद फिर से आज एक कार्यवाही की गयी. सूत्रों के अनुसार यह कार्यवाही पुराने कबाड़ी के इशारे पर की गयी, हैरानी वाली बात यह है कि जिस ट्रक में कबाड़ लड़ा हुआ था. भाजयुमो के मंडल अध्यक्ष अरविन्द गुप्ता की बताई जा रही है जिस पर पुलिश भी कुछ बोलने से कतरा रही है.

भले ही पुलिस कुछ न बोले लेकिन परदे के पीछे की कहानी सभी जानते हैं. जरुरत है इन धंधो पर कठोरता से कार्यवाही करने की ताकि जितने भी अवैध्य धंधे चल रहे हैं उन पर अंकुश लगाया जा सके.



(सहारा समय)

August 20, 2011

Mashal Raili

मनेन्द्रगढ़ को जिला नहीं बनाये जाने का मामला अब गर्माता जा रहा है. स्वंत्रता दिवस पर मुख्य मंत्री रमन सिंह द्वारा घोषित नए ९ जिलो की सूची में मनेन्द्रगढ़ नाम नहीं होने से लोग सड़को पर उतर आये हैं. जिला बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले जिला नहीं जाने के विरोध में ६ दिनों से लगातार कई तरह से प्रदर्शन किये जा रहे हैं. प्रदर्शन ६ वे दिन आज शाम को लोगो ने सड़क में उतर कर मशाल रैली निकली व जिला बनाने की मांग का पुरजोर समर्थन किया. विवेकानंद चौक से प्रारंभ हो कर रैली प्रारंभ हो कर तहसील तक गयी. और वहां मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. मशाल रैली में बड़ी संख्या में नागरिक लोग शामिल हुए. १५ अगस्त से प्रारम्भ इस आन्दोलन में अब तक चक्का जम, महा बंद, शासकीय कार्यालयों को बंद kar, मुस्लिम समाज की रैली,  महिलाओ की रैली, स्कूली बच्चो की रैली के बाद अब मशाल रैली निकल कर प्रदर्शन किया जा रहा है. इसी चरणबद्ध आन्दोलन में मनेन्द्रगढ़ की सबसे पुराणी जिला बनाने की मांग को लेकर कल नगर में सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है.



(सहारा समय)

Schooli bachcho ki Vishal Raili

मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाने के समर्थन में आज ६वे दिन स्कूली बच्चो ने विशाल रैली निकली और रमन सिंह को जगाने की कोसिस की

आन्दोलन के ६वे दिन लगभग ५००० से अधिक स्कूली बच्चो ने विशाल रैली निकली इस रैली में सभी स्कूली बच्चो ने सहभागिता दर्ज कराइ. स्कूली बच्चो की एक ही मांग थी कि मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाया जाये. हम आपको बता दे कि ९ जिलो कि मुख्यमंत्रिय घोषणा के बाद आन्दोलन प्रारम्भ हुआ है. और दिन प्रतिदिन आन्दोलन ताज होता जा रहा है. जिसमे कल महिलाओं ने सहभागता दर्ज करायी और आज स्कूली बच्चो ने रैली निकली.

स्कूली बच्चो ने लगभग १८ स्कूलों के बच्चो में भाग लेकर एस डी एम् को ज्ञापन देने पहुंचे तो आर. डी. एम्. ने आन्दोलन करियो के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही इस बात से बिफरे आन्दोलन कारियों ने एस डी एम् के खिलाफ नारे बाजे की फिर तहसीलदार ने जन आक्रोश देखते हुए ज्ञापन लिया. प्रशासन के खिलाफ नारे बजी को देखते हुए हमने इस सन्दर्भ में नायब तहसीलदार ने बताया आज छुट्टी के दिन एस.डी.एम् कार्यालय और तहसीलदार कार्यालय बंद था इस कारन गयापन लेने में देरी हुई. 

जिला बनाने की मांग आगे किस करवट बैठेगी कि यह कह पाना मुश्किल है लेकिन आन्दोलन की धार दिन प्रतिदिन तेज़ होती जा रही है.


(सहारा समय)

August 19, 2011

Andolan ke liye Nikali Raili

मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाने में दिन प्रति दिन लोगो का समर्थन बढ़ते जा रहा है. अब तक सिर्फ पुरुषो द्वारा आन्दोलन जारी था, लेकिन अब घर की महिलाये भी चूल्हा चौका छोड़ कर सड़को पर उतर आई है साथ ही मुस्लिम में समुदाय ने भी रैली निकल कर मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाने में अपना समर्थन दिया.

आन्दोलन ज्यो ज्यो बढ़ता जा रहा है त्यों त्यों भावुकता से लोग आन्दोलन से जुड़ते जा रहे हैं. पहले महाबंद  चक्का जाम शैक्षणिक संसथान बंद, शासकीय कार्यालय बंद, पेट्रोल पम्प बंद, बैंक बंद, कराने के बाद, ऑटो संघ की हड़ताल के बाद, आज आन्दोलन के पांचवे दिन पर शुक्रवार की नमाज अदा करने के बाद सारे मुस्लिम भाइयों ने मस्जिद से ही रैली निकली, साथ ही रोजे की नमाज़ में डॉ. रमन सिंह को जिला बनाने की दुआ अल्लाह से की. और हजारो की संख्या में विशाल रैली बनाकर शहर के मुख्या चौराहों व सड़को से निकल कर प्रदर्शन करते हुए, तहसीलदार को जिला बनाने के सन्दर्भ में ज्ञापन सौपा. और इसके बाद मनेंद्रगंढ़ जिला बनाओ के आन्दोलन को बढ़ाते हुए साड़ी महिलाओं ने घर छोड़ कर करीब एक किलोमीटर लम्बी रैली निकल कर मुख्या मंत्री को जगाने का प्रयास किया गया. इस रैली में किसी पार्टी विशेष के लोग न हो कर सभी धर्मं और समुदाय के लोग शामिल थे. अपने गृह कार्यो को छोड़ कर महिलाओ ने जिस प्रकार डॉ. रमन सिंह को जगाने का प्रयास किया वो काबिले तारीफ़ था. इस रैली में साड़ी महिलाये जोश खरोश से लबालब थी.

आन्दोलन का ५वा दिन था और अब जिला बनाओ संघर्ष समिति ने संसद डॉ. चरण दस महंत, क्षेत्रीय विधायक दीपक पटेल और भरतपुर विधायक फूलसिंह के संरक्षण में एक टीम गठित की है जो जल्द ही मुख्य मंत्री डॉ. रमण सिंह से मिलेगी और रायपुर मिलने जाएगी. और मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाने की अपनी मांग को पुख्ता तौर पर उनके समक्ष रखेगी.


(सहारा समय)